China WTO Complaint-China ने भारत के खिलाफ WTO में EV Battery Subsidy को लेकर शिकायत दर्ज की — जानिए इससे भारत को फायदा होगा या नुकसान?
वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग में भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी है। अब चीन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में औपचारिक शिकायत दर्ज की है। चीन का आरोप है कि भारत की EV और बैटरी सब्सिडी नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करती हैं और भारतीय कंपनियों को अनुचित लाभ (unfair advantage) देती हैं। यह विवाद न केवल आर्थिक स्तर पर बल्कि भू-राजनीतिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- China WTO Complaint-China ने भारत के खिलाफ WTO में EV Battery Subsidy को लेकर शिकायत दर्ज की — जानिए इससे भारत को फायदा होगा या नुकसान?
- 📌 क्या है मामला?
- ⚖️ WTO में शिकायत दर्ज करने का मतलब क्या है?
- 🇮🇳 भारत की प्रतिक्रिया
- 🔋 भारत की EV नीति और बैटरी सब्सिडी क्या है?
- 💰 BYD और Tesla की भूमिका
- 📊 भारत के लिए फायदे और नुकसान
- 📈 भारतीय उपभोक्ताओं पर असर
- 📚 स्रोत (Sources)
- ⚠️ Disclaimer
📌 क्या है मामला?
चीन ने आरोप लगाया है कि भारत की Production Linked Incentive (PLI) स्कीम, FAME-II (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles) योजना, और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली अन्य सब्सिडी योजनाएँ WTO के “Agreement on Subsidies and Countervailing Measures” के नियमों का उल्लंघन करती हैं। इन योजनाओं के तहत भारत घरेलू EV निर्माताओं और बैटरी उत्पादकों को वित्तीय सहायता, कर छूट और प्रोत्साहन दे रहा है — जबकि विदेशी कंपनियों, विशेष रूप से चीन की, को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।
चीन का दावा है कि इससे भारतीय कंपनियाँ जैसे Tata Motors, Mahindra Electric, Ola Electric और Exide Energy को अनुचित लाभ मिल रहा है, जबकि चीनी कंपनियाँ भारतीय बाजार में कीमत और प्रतिस्पर्धा दोनों में पिछड़ रही हैं।
⚖️ WTO में शिकायत दर्ज करने का मतलब क्या है?
WTO में किसी देश द्वारा शिकायत दर्ज करना यह दर्शाता है कि उसे लगता है कि किसी सदस्य देश की नीति वैश्विक व्यापार नियमों के विपरीत है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में होती है —
- पहला चरण: परामर्श (Consultation) — दोनों देश बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश करते हैं।
- दूसरा चरण: पैनल गठन (Panel Formation) — यदि बात नहीं बनती तो WTO एक पैनल बनाता है जो जांच करता है।
- तीसरा चरण: निर्णय और अपील — WTO का फैसला आता है, जिसे दोनों देश मान सकते हैं या अपील कर सकते हैं।
🇮🇳 भारत की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने इस शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि — “हमारी सभी EV और बैटरी नीतियाँ WTO के नियमों के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत मिशन (Make in India) को प्रोत्साहन देना है।” सरकारी अधिकारियों के अनुसार, FAME और PLI योजनाएँ केवल घरेलू उत्पादन और पर्यावरणीय लक्ष्यों को बढ़ावा देने के लिए हैं, न कि किसी विदेशी देश को नुकसान पहुँचाने के लिए।
भारत यह भी तर्क दे सकता है कि उसकी सब्सिडी “environmental protection” और “green transition” से जुड़ी हैं — जिन्हें WTO के नियमों के तहत कुछ हद तक अनुमति दी गई है।
🔋 भारत की EV नीति और बैटरी सब्सिडी क्या है?
भारत की EV नीतियाँ 2021 से लगातार सक्रिय रूप से लागू हैं। इनमें प्रमुख योजनाएँ हैं:
- FAME-II Scheme: ₹10,000 करोड़ का बजट, जिसका उद्देश्य 10 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और 5 लाख थ्री-व्हीलर को सब्सिडी देना है।
- PLI Scheme for Advanced Chemistry Cell (ACC): ₹18,100 करोड़ का फंड जो बैटरी निर्माण कंपनियों को प्रोत्साहन देता है।
- State EV Policies: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात जैसे राज्यों ने टैक्स में छूट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्रांट दी है।
इन योजनाओं की मदद से भारत का EV सेक्टर 2023–25 के बीच 75% की दर से बढ़ा है। हाल ही में Ola Electric, Tata Motors, और Mahindra ने अपने EV डिवीज़न के वैल्यूएशन में 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।
💰 BYD और Tesla की भूमिका
चीन की सबसे बड़ी EV निर्माता कंपनी BYD भारत में तेजी से विस्तार करना चाहती थी, लेकिन उसे सरकारी मंज़ूरी में कई बार अड़चनें आईं। Tesla ने भी भारत में एंट्री के लिए import duty में राहत मांगी थी, लेकिन भारत ने साफ कहा — “पहले स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग शुरू करें।” अब यह विवाद इस दिशा में चीन और भारत के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।
वहीं, Tesla (NASDAQ: TSLA) का शेयर 11 अक्टूबर 2025 को $413.49 पर बंद हुआ जबकि BYD (HKG: 1211) का शेयर हांगकांग एक्सचेंज पर 3.2% गिरकर HK$247.60 पर रहा। इन दोनों कंपनियों के निवेशक अब भारत की EV नीति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
📊 भारत के लिए फायदे और नुकसान
✅ फायदे:
- देशी कंपनियों को आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन का बढ़ावा मिलेगा।
- भारत की EV नीति वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान बनाएगी।
- लंबे समय में बेहतर नियमन और पारदर्शिता आएगी।
❌ नुकसान:
- अगर WTO का फैसला चीन के पक्ष में जाता है, तो भारत को सब्सिडी घटानी पड़ सकती है।
- विदेशी निवेशक भारत की नीतियों को लेकर असमंजस में पड़ सकते हैं।
- स्थानीय EV निर्माताओं की लागत बढ़ सकती है, जिससे गाड़ियों की कीमतें ऊपर जा सकती हैं।
📈 भारतीय उपभोक्ताओं पर असर
अगर भारत को WTO के फैसले के तहत अपनी सब्सिडी में बदलाव करने पड़ते हैं, तो EV की कीमतें बढ़ सकती हैं। वर्तमान में भारत में EV कारें और स्कूटर सरकार की सब्सिडी से 15–25% सस्ती मिलती हैं। यदि यह राहत हटाई गई, तो Tata Nexon EV, MG ZS EV, और Ola S1 जैसी गाड़ियों की कीमतों में ₹60,000 से ₹1.2 लाख तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि, अगर भारत WTO में अपना पक्ष मजबूती से रखता है, तो यह विवाद भारतीय EV नीति को वैश्विक वैधता और मजबूती प्रदान करेगा, जिससे दीर्घकालिक रूप से उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
📚 स्रोत (Sources)
- Economic Times – “China files complaint against India in WTO over EV battery subsidies”
- Reuters – “China takes India to WTO over EV, battery subsidies”
- Times of India – “China accuses India of unfair trade advantage in EV sector”
- AutocarPro – “India’s EV growth and subsidy framework”
- Google Finance – Tesla & BYD Stock Updates
⚠️ Disclaimer
यह लेख केवल सूचना और विश्लेषणात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। सरकारी नीतियों में परिवर्तन संभव है, इसलिए किसी भी निवेश या व्यापारिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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