EV Prices Will Match Petrol and Diesel in 4–6 Months, Says Nitin Gadkari | India’s EV Revolution 2025 क्या ऐसा हो सकता है।

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EV Prices Will Match Petrol and Diesel in 4–6 Months: नितिन गडकरी का बड़ा दावा

भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि आने वाले 4 से 6 महीनों के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की कीमतें पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले वाहनों के बराबर हो जाएंगी। यह बयान भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। अगर यह भविष्यवाणी सच होती है, तो देश में EV क्रांति पहले से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ सकती है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति

पिछले कुछ वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ा है। सरकार की “फेम-2 योजना” (FAME II) और विभिन्न राज्यों की सब्सिडी योजनाओं ने EV की मांग को प्रोत्साहित किया है। हालांकि, अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारंभिक कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए एक प्रमुख चुनौती बनी हुई थीं। यही कारण था कि बहुत से उपभोक्ता अब भी पेट्रोल और डीज़ल वाहनों को प्राथमिकता देते हैं।

नितिन गडकरी का यह बयान इस चुनौती का समाधान देता हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती स्थानीय उत्पादन क्षमता, घटती बैटरी लागत और बेहतर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के चलते EVs जल्द ही आम जनता की पहुंच में होंगे।

गडकरी का बयान और उसका आधार

गडकरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि आने वाले कुछ महीनों में EV और पेट्रोल/डीजल वाहनों की कीमतों में कोई खास अंतर नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर EV उत्पादन को सस्ता और प्रभावी बनाने पर काम कर रहे हैं। भारत में अब कई कंपनियाँ बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, मोटर प्रोडक्शन और चार्जिंग सिस्टम में निवेश कर रही हैं।

इसके अलावा, सरकार देशभर में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ा रही है ताकि लोगों को EV चार्जिंग की समस्या न हो। केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कर राहत और सब्सिडी दे रही हैं।

क्यों घटेंगी EV की कीमतें?

गडकरी के बयान के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं, जो EVs की कीमतों को नीचे ला सकते हैं:

  • बैटरी की लागत में गिरावट: बैटरी EV का सबसे महंगा हिस्सा होती है। भारत में अब लिथियम-आयन और सॉलिड-स्टेट बैटरियों का घरेलू उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे लागत में तेजी से कमी आएगी।
  • स्थानीय निर्माण (Localization): अब भारतीय कंपनियाँ इलेक्ट्रिक मोटर, कंट्रोलर, चार्जर और अन्य कंपोनेंट का उत्पादन देश में ही कर रही हैं। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी।
  • मास प्रोडक्शन का प्रभाव: जैसे-जैसे EV की मांग बढ़ेगी, बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा और प्रति यूनिट कीमत कम हो जाएगी।
  • सरकारी सहायता: केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे टैक्स लाभ, सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाएँ उपभोक्ताओं के लिए कीमतें घटाने में मदद करेंगी।
  • तकनीकी नवाचार: नई टेक्नोलॉजी, जैसे कि स्वैपेबल बैटरी और फास्ट चार्जिंग, कुल लागत घटाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

EV और पेट्रोल/डीजल वाहनों की कीमतों की तुलना

वर्तमान में एक औसत पेट्रोल कार की कीमत ₹8 से ₹12 लाख तक होती है, जबकि समान श्रेणी की एक इलेक्ट्रिक कार ₹12 से ₹15 लाख तक की पड़ती है। इसी तरह, एक पेट्रोल स्कूटर लगभग ₹1 लाख का पड़ता है, जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटर ₹1.3 से ₹1.5 लाख तक का होता है।

गडकरी का दावा है कि आने वाले महीनों में यह अंतर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यदि ऐसा हुआ, तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ेगा और EVs मुख्यधारा बन जाएँगे।

ऑटोमोबाइल सेक्टर पर संभावित प्रभाव

यदि EV की कीमतें सचमुच पेट्रोल और डीज़ल वाहनों के बराबर हो जाती हैं, तो इसका असर पूरे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ेगा। पारंपरिक वाहन निर्माता कंपनियाँ अब अपनी रणनीति को EV की ओर मोड़ने के लिए मजबूर होंगी। टाटा, महिंद्रा, ह्युंडई, और MG जैसी कंपनियाँ पहले ही अपने EV मॉडल्स पर आक्रामक रूप से काम कर रही हैं। वहीं, जापानी कंपनियाँ जैसे कि टोयोटा और होंडा अब EV तकनीक पर निवेश बढ़ा रही हैं।

उपभोक्ताओं के लिए फायदे

  • कम चलने की लागत: EV की रनिंग कॉस्ट प्रति किलोमीटर पेट्रोल की तुलना में 80% तक कम है।
  • सरल मेंटेनेंस: EV में इंजन नहीं होता, जिससे ऑयल चेंज, फिल्टर आदि की झंझट नहीं रहती।
  • पर्यावरण संरक्षण: EV शून्य प्रदूषण (Zero Emission) देता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
  • सरकारी लाभ: EV खरीदने पर टैक्स रिबेट, सड़क टैक्स माफी और पार्किंग छूट जैसी सुविधाएँ मिलती हैं।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़त

गडकरी ने यह भी कहा कि देशभर में चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में भारत में 10,000 से अधिक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, और सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक यह संख्या 1 लाख तक पहुँचे। इसके अलावा, कई कंपनियाँ EV चार्जिंग को सोलर एनर्जी से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा।

क्या यह समयसीमा वास्तविक है?

विशेषज्ञों का मानना है कि गडकरी की यह भविष्यवाणी महत्वाकांक्षी जरूर है लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं। EV बाजार में पहले से ही प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। टाटा मोटर्स की नेक्सॉन EV और महिंद्रा की XUV400 जैसी गाड़ियाँ भारतीय बाजार में सफल साबित हुई हैं। अगर सरकार सब्सिडी बनाए रखती है और बैटरी मटेरियल की लागत नियंत्रित रहती है, तो अगले कुछ महीनों में यह बदलाव संभव है।

विदेशी कंपनियों की नजर भारत पर

टेस्ला, BYD, और किआ जैसी कंपनियाँ भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं। अगर EVs की कीमतें पेट्रोल वाहनों के समान हो जाती हैं, तो भारत का EV बाजार विश्व के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन जाएगा। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।

निष्कर्ष

नितिन गडकरी का बयान भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार करता है। यदि अगले 4 से 6 महीनों में EVs की कीमतें पेट्रोल और डीज़ल वाहनों के बराबर हो जाती हैं, तो भारत पूरी तरह से ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठा लेगा। यह न केवल प्रदूषण को कम करेगा बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र बनने में भी मदद करेगा।

Source: Times of India

AI Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कृपया किसी भी निवेश या खरीद निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करें।

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लेखक परिचय

मैं Prince Sharma, Automobile9.com का संस्थापक और लेखक हूँ। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक ऑटोमोबाइल जगत की सटीक और उपयोगी जानकारी पहुँचाना। साथ ही, अपने YouTube चैनल Prince Sharma Fact के माध्यम से मैं कार और बाइक से जुड़ी रोचक जानकारियाँ पहुंचाना
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