कारवाले ने 26 सितंबर 2025 को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें वे **E20 पेट्रोल (20% ethanol + 80% petrol blend)** की जानकारी दे रहे हैं — रोलआउट, फायदे, नुकसान और इंजन संगतता। इस लेख में हम उसी जानकारी को साफ़ और समझने योग्य तरीके से आपके लिए पेश कर रहे हैं। (CarWale) 0
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल में 20% ethanol (बायोफ्यूल) और 80% पारंपरिक पेट्रोल होता है। यह E10 (10% ethanol) से अधिक ethanol मिश्रण है। इसका उद्देश्य है ईंधन को अधिक हरित बनाना और fossil fuel पर निर्भरता कम करना। 1
Ethanol किससे बनता है?
Ethanol मुख्यतः कृषि उपज जैसे गन्ना, मोलासिस, गेहूं, चावल की भूसी आदि से बनाया जाता है। ये renewable source है और स्थानीय कच्चे माल (biomass) से उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है। 2
भारत में E20 रोलआउट की योजना
- भारत सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरे देश में E20 उपलब्ध हो। 3
- पहले E10 का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन अब यह blend बढ़ाकर E20 किया जाना है। 4
- इस परिवर्तन से पर्यावरणीय लाभ और तेल आयात पर दबाव कम होने की उम्मीद है। 5
फायदे (Advantages) of E20
- Greenhouse gas emissions कम हो सकती हैं क्योंकि ethanol एक partially renewable fuel है। 6
- Crude oil import dependency घटेगी — विदेशी तेल पर खर्च कम होगा। 7
- यदि इंजन E20-compatibility के हिसाब से बना हो, तो माइलेज में सुधार हो सकता है (context-dependent)। 8
चुनौतियाँ और संभावित नुकसान (Disadvantages / Risks)
- यदि इंजन E20 में चलने के लिए design न हुआ हो, तो माइलेज गिर सकती है। 9
- Engine components में तेजी से घिसाव हो सकता है अगर materials compatibility कम हो। 10
- E20 फ्यूल hygroscopic (नमी को खींचने वाली) होती है, जिससे टैंक में पानी मिलने का खतरा बढ़ सकता है। 11
- Maintenance cost बढ़ सकती है, क्योंकि इंजन adaptation और filtering सिस्टम को मजबूत होना चाहिए। 12
इंजन संगतता (Engine Compatibility)
सभी इंजन E20 उपयोग के लिए तैयार नहीं होते। E20-compatibility का मतलब है कि इंजन को ethanol mixture से नकारात्मक प्रभाव से बचाने वाले components होने चाहिए, जैसे seal materials, fuel line compatibility आदि। अगर वाहन पुराना या low-spec engine है, तो E20 इस्तेमाल करने से इंजन problems हो सकती हैं। 13
रियल वर्ल्ड रिपोर्ट्स और अध्ययन
कुछ studies में यह देखा गया है कि E20 वाले इंजन में optimized design हो, तो माइलेज slight बढ़ सकता है। लेकिन बाहर की conditions, रोड कंडीशन, वाहन लोड आदि की वजह से variation होगा। 14
भारत की चुनौतियाँ और तैयारी
- Fuel station infrastructure को upgrade करना होगा ताकि E20 dispensing safely हो सके।
- Regulatory standardization और certification प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए।
- लोकल vehicle manufacturers को भी E20-compatibility design की दिशा में काम करना पड़ेगा।
- Public awareness और वाहन मालिकों को education देना ज़रूरी है ताकि गलत मिश्रण या misuse न हो।
रूपरेखा (Roadmap) और टाइमलाइन
जैसा कि CarWale रिपोर्ट में कहा गया है, E20 rollout इस वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरे देश में होना है। इसके लिए चरणबद्ध implementation की योजना है — metropolitan areas से शुरुआत, उसके बाद tier-2 /tier-3 cities और rural areas तक। 15
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव (Consumer Tips)
- यदि आपका वाहन नया है या manufacturer ने E20 compatibility का दावा किया है, तो इसे प्रयोग करना सुरक्षित हो सकता है।
- पुराने या low-spec इंजन में E20 इस्तेमाल करने से पहले mechanic से सलाह लें।
- Fuel station पर dispensing condition (clean nozzles, moisture control) को जांचें।
- Fuel filters और periodic maintenance को अधिक ध्यान दें।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल भारत की energy और environment strategy में एक अहम कदम हो सकता है। यदि इंजन compatibility और infrastructure सही तरीके से manage किया जाए, तो यह ईंधन मिश्रण देश को अधिक sustainable direction में ले जा सकता है। पर सावधानी जरूरी है — हर वाहन और इंजन E20 के अनुकूल नहीं होते। उपयोगकर्ता को जानकारी, awareness और proper maintenance से ही E20 का लाभ मिलता है।

